चुनाव के दौरान एक जिम्मेदार नागरिक की ज़िम्मेदारी

 

चुनाव के दौरान एक जिम्मेदार नागरिक की ज़िम्मेदारी

एक नागरिक की भूमिका केवल वोट डालने तक सीमित नहीं होती।

✅ मुख्य जिम्मेदारियाँ:

  • बिना डर, लालच या जाति-धर्म के सोच-समझकर वोट देना

  • अफवाहों, फेक न्यूज़ और भावनात्मक उकसावे से खुद को दूर रखना

  • उम्मीदवार का काम, चरित्र और योग्यता देखना

  • पैसे, शराब, सामान जैसे चुनावी प्रलोभनों को सिरे से नकारना

  • दूसरों को भी वोट देने के लिए प्रेरित करना, खासकर युवा और पहली बार वोट देने वाले

👉 लोकतंत्र में “चुप रहना” भी एक तरह की गैर-जिम्मेदारी है।

पढ़े-लिखे और योग्य मंत्री कैसे चुनकर आ सकते हैं?

सच यह है कि नेता वही बनते हैं जैसे वोटर चाहते हैं

अगर वोटर पूछें:

  • आपने क्या पढ़ा है?

  • आपका प्रशासनिक/सामाजिक अनुभव क्या है?

  • आपने क्षेत्र के लिए अब तक क्या किया?

  • आपके खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला तो नहीं?

तो पार्टियाँ भी मजबूर होंगी योग्य और शिक्षित उम्मीदवार उतारने के लिए।

✅ आज समस्या यह नहीं कि पढ़े-लिखे लोग नहीं हैं
❌ समस्या यह है कि हम उन्हें पहचानते या महत्व नहीं देते

हमें व्यक्तिगत रूप से क्या करना चाहिए? (Action Plan)

आप अकेले भी बदलाव शुरू कर सकते हैं:

  1. अपने परिवार और मित्रों में “सोचकर वोट” की संस्कृति बनाइए

  2. WhatsApp University से आगे बढ़कर सरकारी पोर्टल से जानकारी साझा करें

  3. अच्छे उम्मीदवार को खुले तौर पर समर्थन दीजिए

  4. चुनाव के बाद भी सवाल पूछते रहिए — RTI, सोशल मीडिया, जनप्रतिनिधि कार्यालय के माध्यम से

  5. युवाओं और महिलाओं को राजनीतिक चर्चा में शामिल करें

लोकतंत्र सिर्फ चुनाव के दिन ज़िंदा नहीं होता,
वह रोज़ जवाबदेही से ज़िंदा रहता है।

आज देश में मंत्रियों की पढ़ाई की सच्चाई

  • देश के कई मंत्री शिक्षा के न्यूनतम स्तर पर भी खरे नहीं उतरते

  • कुछ के खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप हैं

  • पर साथ ही कई मंत्री ऐसे भी हैं जो

    • उच्च शिक्षित

    • नीति-निर्माण में सक्षम

    • और ज़मीन से जुड़े हुए हैं

👉 फर्क सिर्फ इतना है कि किसे हम चुनते हैं

इस तस्वीर को कैसे बदला जा सकता है?

🧠 सोच बदलकर
🗳 वोट बदलकर
📢 सवाल पूछकर
🤝 ईमानदार लोगों का साथ देकर

तीन सुनहरे नियम याद रखें:

  1. भावना से नहीं, विवेक से वोट

  2. जाति से नहीं, योग्यता से वोट

  3. सिर्फ आज नहीं, भविष्य को देखकर वोट

अंतिम बात (सीधी और खरी)

अगर आज हम गलत व्यक्ति को चुनते हैं,
तो कल खराब व्यवस्था की शिकायत करने का नैतिक हक कम हो जाता है।

लेखक:
श्री. दिनेश मिश्रा
(समाजसेवी | लेखक | मानवाधिकार एवं महिला सशक्तिकरण पर कार्यरत)

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