जब देश
में चुनाव है, तो स्वप्नालय कैसे पीछे रह सकता है…
श्री. दिनेश
मिश्रा
इन
दिनों पूरे देश में चुनाव का माहौल है। हर तरफ लोकतंत्र की चर्चा है—मतदान, अधिकार, आचार
संहिता, जिम्मेदारी।
ऐसे समय में मेरे मन में एक सवाल आया—जब पूरा
देश लोकतंत्र जी रहा है, तो स्वप्नालय कैसे पीछे रह सकता है?
हम
स्वप्नालय में केवल बच्चों को आश्रय नहीं देते, हम उन्हें संविधान
के मूल्यों पर जीना सिखाते हैं।
हम भारतीय संविधान को
सिर्फ पढ़ाते नहीं, उसे रोज़मर्रा के जीवन में उतारते हैं।
और JJ Act 2015 भी यही कहता है—बच्चों की भागीदारी, उनकी
आवाज़ और निर्णय लेने का अधिकार।
इसी
सोच से स्वप्नालय की क्रांति कमेटी ने
चुनाव की घोषणा की।
यह
चुनाव हमारे लिए कोई औपचारिक गतिविधि नहीं है।
यह बच्चों को यह सिखाने का माध्यम है कि लोकतंत्र
कैसे काम करता है, और जिम्मेदारी कैसे निभाई जाती है।
चुनाव
से जुड़ी प्रमुख तिथियाँ
- चुनाव घोषणा: ०८.१२.२०२५
- नामांकन प्रारंभ: १०.१२.२०२५
- नामांकन की अंतिम तिथि: १५.१२.२०२५
- नाम वापसी: १७.१२.२०२५
- चुनाव प्रचार अवधि: १७.१२.२०२५
से २४.१२.२०२५ (रात १२ बजे तक)
- मतदान (Polling Day): २५.१२.२०२५, दोपहर
३ बजे से
- मतगणना: २६.१२.२०२५, सुबह
११ बजे (सभी के सामने)
- परिणाम घोषणा: २६.१२.२०२५, दोपहर
१२ बजे
- शपथ विधि: २६.१२.२०२५, दोपहर
०३ बजे
प्रक्रिया
जो बच्चों ने खुद गढ़ी
1. मतदाता सूची
मतदाता सूची किसी ऑफिस में नहीं बनी।
लड़कियों ने आपस में चर्चा की, संवाद
किया और
स्वयं मतदाता सूची तैयार की, जिसमें
स्वप्नालय की सभी लड़कियाँ और कर्मचारी शामिल हैं।
यह अपने आप में सहभागिता का सुंदर उदाहरण है।
2. उम्मीदवार चयन
यहाँ किसी को खड़ा नहीं किया गया।
लड़कियों ने खुद को
उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत किया।
यह आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी है।
3. चुनाव प्रचार
रैलियाँ हुईं, भाषण दिए गए, घोषणापत्र
जारी हुए।
विचार रखे गए, वादे किए गए—बिना डर, बिना
दबाव।
4. मतदान प्रक्रिया
मतदान बेलेट पेपर के
माध्यम से होगा—
गोपनीय, स्वतंत्र और निष्पक्ष।
हर वोट का सम्मान।
5. मतगणना
मतगणना सभी लड़कियों के सामने, पूरी
पारदर्शिता के साथ होगी।
क्योंकि लोकतंत्र में भरोसा सबसे बड़ी पूँजी है।
6. क्रांति कमेटी का गठन
जिसे बहुमत मिलेगा, वही नेतृत्व करेगा।
यही लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है।
आचार
संहिता: सत्ता नहीं, संस्कार
हमने
चुनाव के साथ आचार संहिता भी
स्पष्ट की है—
- स्वप्नालय के साहित्य या वस्तुओं का दुरुपयोग नहीं होगा
- किसी भी प्रकार का प्रलोभन अपराध माना जाएगा
- डर, दबाव या भेदभाव की कोई जगह नहीं
- भाषा, व्यवहार और प्रचार—सब मर्यादित होगा
मैं
बच्चों को बार-बार यही कहता हूँ—
नेतृत्व का मतलब ताकत नहीं, जिम्मेदारी
है।
मेरे
लिए यह चुनाव क्यों ज़रूरी है
क्योंकि
मैं चाहता हूँ कि ये लड़कियाँ कल सिर्फ वोट देने वाली नागरिक न बनें,
बल्कि समझदार, संवेदनशील
और जिम्मेदार नागरिक बनें।
यह
चुनाव उन्हें सिखाता है कि—
- अधिकार के साथ कर्तव्य भी होता है
- असहमति भी सम्मान से की जा सकती है
- और लोकतंत्र सिर्फ व्यवस्था नहीं, एक
संस्कृति है
अंत
में
स्वप्नालय
का यह चुनाव एक छोटा-सा प्रयास है,
लेकिन इसके भीतर बड़ा
भविष्य छुपा है।
अगर हम
बच्चों को आज लोकतंत्र जीना सिखा पाए,
तो कल देश को ईमानदार, संवेदनशील
और मजबूत नेतृत्व मिलेगा।
यही
स्वप्नालय की क्रांति है।


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