"सलाह नहीं, साथ चाहिए!"

सलाह नहीं, साथ चाहिए!
संघर्ष से आत्मविश्वास तक की एक सच्ची भावना
हम ऐसे समाज में रहते हैं जहाँ
सलाह हर किसी के पास होती है —
लेकिन साथ बहुत कम लोग देते हैं।
जब कोई संघर्ष कर रहा होता है,
तो लोग कहते हैं —
“हिम्मत रखो”
“सब ठीक हो जाएगा”
“समय बदल जाएगा”
लेकिन कोई यह नहीं पूछता —
“मैं क्या कर सकता हूँ?”
यही से शुरू होती है यह कहानी।
एक ऐसी आवाज़ की कहानी —
जो सलाह नहीं, साथ मांग रही थी।
संघर्ष: जब रास्ते कठिन हों
उसके दिन जल्दी शुरू होते थे
और देर से खत्म।
काम का दबाव,
जिम्मेदारियों का बोझ,
और समाज की उम्मीदें —
सब एक साथ।
हर कोई उसे सही रास्ता बताना चाहता था,
लेकिन कोई भी उस रास्ते पर
साथ चलने को तैयार नहीं था।
वह कई बार टूटी,
कई बार रोई,
लेकिन हर बार
खुद को समेट कर खड़ी हो गई।
क्योंकि उसे अब समझ आ गया था —
संघर्ष कमजोरी नहीं, तैयारी होते हैं।
सलाह बनाम साथ
सलाह शब्दों में होती है।
साथ कर्म में।
सलाह दूर से दी जाती है।
साथ पास आकर निभाया जाता है।
एक दिन किसी ने उसे यह नहीं कहा कि
“तुम्हें ऐसा करना चाहिए”
उसने सिर्फ इतना कहा —
“मैं हूँ, चलो।”
उस एक वाक्य ने
उसकी थकी हुई आत्मा को
फिर से सांस दी।
प्रेरणा: बाहर नहीं, भीतर से
वह समझ गई —
प्रेरणा भाषणों से नहीं मिलती।
प्रेरणा तब जन्म लेती है
जब कोई आपके साथ खड़ा हो
या जब आप खुद
अपने साथ खड़े हो जाएँ।
हर असफलता ने उसे सिखाया —
हार मानना विकल्प नहीं है।
हर गिरावट ने बताया —
वह पहले से ज्यादा मजबूत है।
सफलता की नई परिभाषा
अब सफलता उसके लिए
सिर्फ पैसा या पद नहीं थी।
सफलता थी —
डर के बावजूद आगे बढ़ना
“ना” कहने का साहस
मदद माँगने में झिझक न होना
और खुद पर भरोसा रखना
जब पहली छोटी जीत मिली,
तो शोर कम था,
लेकिन आत्मसम्मान बहुत बड़ा था।
आत्मविश्वास: सबसे बड़ा साथ
धीरे-धीरे उसने यह सीखा —
अगर कोई साथ दे या न दे,
उसे खुद का साथ कभी नहीं छोड़ना है।
अब वह दूसरों से यह नहीं पूछती थी —
“मैं क्या करूँ?”
अब वह खुद से कहती थी —
“मैं कर सकती हूँ।”
सलाह अब भी मिलती थी,
लेकिन अब वह जानती थी —
साथ किसका लेना है और
किसे सिर्फ सुनकर छोड़ देना है।
निष्कर्ष: एक जरूरी सवाल
यह कहानी हर उस इंसान की है
जो टूटते हुए भी
खुद को संभाल रहा है।
आज अगर आपके आसपास
कोई संघर्ष कर रहा है,
तो उसे सलाह देने से पहले
बस इतना पूछिए —
👉 “मैं तुम्हारे साथ कैसे चल सकता हूँ?”
क्योंकि
सलाह बहुत लोग देते हैं,
लेकिन साथ वही देता है
जो सच में परवाह करता है।
✨ कभी-कभी किसी की ज़िंदगी बदलने के लिए
ज्ञान नहीं,
सिर्फ उपस्थिति काफी होती है।

श्री. दिनेश मिश्रा

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