जब देश में चुनाव है, तो स्वप्नालय कैसे पीछे रह सकता है…
— एक जीवंत लोकतांत्रिक अभ्यास की विस्तृत रिपोर्ट
लेखक : श्री. दिनेश मिश्रा
प्रस्तावना: लोकतंत्र सिर्फ पढ़ने की नहीं, जीने की प्रक्रिया
इन दिनों पूरा देश लोकतंत्र के उत्सव में डूबा हुआ है।
चारों ओर चुनाव की चर्चा है—मतदान का अधिकार, नागरिक की जिम्मेदारी, आचार संहिता, और संविधान के प्रति निष्ठा।
यह केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनभागीदारी, विश्वास और जवाबदेही का महापर्व है।
इसी राष्ट्रीय वातावरण के बीच स्वप्नालय में एक स्वाभाविक और गहरा प्रश्न उभरा—
जब पूरा देश लोकतंत्र को जी रहा है, तो स्वप्नालय के बच्चे इससे कैसे दूर रह सकते हैं?
क्या लोकतंत्र केवल 18 वर्ष के बाद समझने और अपनाने की चीज़ है,
या इसे बचपन से अनुभव कराना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है?
स्वप्नालय केवल एक बालगृह नहीं है।
यह वह स्थान है जहाँ बच्चों को सुरक्षित आश्रय के साथ-साथ
संविधान के मूल मूल्य—समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय—के साथ जीना सिखाया जाता है।
यहाँ बच्चों को केवल अधिकारों की जानकारी नहीं दी जाती,
बल्कि उन्हें यह भी सिखाया जाता है कि अधिकारों के साथ कर्तव्य और जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।
स्वप्नालय में भारतीय संविधान केवल पाठ्यपुस्तक का विषय नहीं है।
यह रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा है—
संवाद में, निर्णय में, असहमति में और सामूहिक जिम्मेदारी में।
JJ Act 2015 भी बच्चों की सहभागिता, उनकी राय, उनकी आवाज़
और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को स्पष्ट रूप से मान्यता देता है।
यह कानून बच्चों को केवल संरक्षण का पात्र नहीं,
बल्कि सक्रिय सहभागी नागरिक के रूप में देखने का दृष्टिकोण देता है।
इसी संवैधानिक सोच और बाल-अधिकारों की भावना से प्रेरित होकर
स्वप्नालय की क्रांति कमेटी ने यह निर्णय लिया कि
बच्चों के लिए लोकतंत्र को समझाने के बजाय,
उन्हें लोकतंत्र जीने का अवसर दिया जाए।
इस विचार से स्वप्नालय में एक पूर्ण लोकतांत्रिक, पारदर्शी और बाल-मैत्रीपूर्ण चुनाव प्रक्रिया आयोजित की गई—
जहाँ बच्चों ने स्वयं नियम बनाए,
उम्मीदवारी प्रस्तुत की,
प्रचार किया,
मतदान किया
और परिणाम स्वीकार किए।
यह चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं था,
बल्कि यह बच्चों के भीतर
आत्मविश्वास, नेतृत्व, सहभागिता और जिम्मेदार नागरिकता के बीज बोने का एक सशक्त प्रयास था।
2️⃣ क्रांति कमेटी चुनाव: एक वास्तविक लोकतंत्र का अभ्यास
यह चुनाव किसी औपचारिक या प्रतीकात्मक गतिविधि के लिए नहीं था।
यह बच्चों को यह सिखाने का माध्यम था कि—
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लोकतंत्र कैसे काम करता है
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निर्णय कैसे लिए जाते हैं
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बहुमत, असहमति और जिम्मेदारी का क्या अर्थ है
यह पूरी प्रक्रिया बच्चों द्वारा, बच्चों के लिए और बच्चों के साथ गढ़ी गई।
3️⃣ चुनाव से जुड़ी प्रमुख तिथियाँ
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चुनाव घोषणा: ०८.१२.२०२५
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नामांकन प्रारंभ: १०.१२.२०२५
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नामांकन की अंतिम तिथि: १५.१२.२०२५
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नाम वापसी: १७.१२.२०२५
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चुनाव प्रचार अवधि: १७.१२.२०२५ से २४.१२.२०२५ (रात १२ बजे तक)
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मतदान (Polling Day): २५.१२.२०२५, दोपहर ३ बजे से
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मतगणना: २६.१२.२०२५, सुबह ११ बजे
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परिणाम घोषणा: २६.१२.२०२५, दोपहर १२ बजे
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शपथ विधि: २६.१२.२०२५, दोपहर ०३ बजे
4️⃣ बच्चों द्वारा गढ़ी गई चुनाव प्रक्रिया
🗳️ 1. मतदाता सूची
मतदाता सूची किसी कार्यालय में नहीं बनी।
लड़कियों ने आपस में संवाद किया, चर्चा की और स्वयं मतदाता सूची तैयार की, जिसमें स्वप्नालय की सभी लड़कियाँ और कर्मचारी शामिल थे।
यह प्रक्रिया सहभागिता और पारदर्शिता का सुंदर उदाहरण बनी।
👩💼 2. उम्मीदवार चयन
यहाँ किसी को उम्मीदवार नहीं बनाया गया।
लड़कियों ने स्वयं आगे आकर उम्मीदवारी घोषित की।
यह आत्मविश्वास और नेतृत्व की पहली सीढ़ी थी।
📢 3. चुनाव प्रचार
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रैलियाँ निकाली गईं
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भाषण दिए गए
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घोषणापत्र तैयार किए गए
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व्यक्तिगत संवाद और समूह प्रचार किया गया
हर लड़की ने अपने विचार, योजनाएँ और सपने बिना डर और दबाव के रखे।
🗳️ 4. मतदान प्रक्रिया
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मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से हुआ
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प्रत्येक बैलेट बॉक्स पर चुनाव चिन्ह लगाए गए
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वोट डालने से पहले बैलेट पेपर को सही ढंग से मोड़ा गया
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मतदान के बाद सभी मतदाताओं की उँगलियों पर स्याही लगाई गई
हर कदम वास्तविक चुनाव प्रक्रिया की तरह पूरी गंभीरता से निभाया गया।
📊 5. मतगणना
मतगणना सभी लड़कियों के सामने, पूरी पारदर्शिता के साथ की गई।
क्रांति कमेटी के पूर्व सदस्यों ने स्वयं मतदान पेटी खोलकर हर मत को ध्यान से देखा और गिनती की।
यह भरोसे और निष्पक्षता का जीवंत उदाहरण था।
🏛️ 6. परिणाम और शपथ विधि
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वीर बाल दिवस के अवसर पर चुनाव परिणाम घोषित किए गए
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शपथ विधि के समय जान फाउंडेशन के डायरेक्टर बच्चों के साथ सहभागी रहे
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बच्चों ने पूरे चुनाव की प्रक्रिया स्वयं डायरेक्टर को समझाई
इस संवाद ने बच्चों के आत्मविश्वास और समझ को और गहरा किया।
5️⃣ आचार संहिता: सत्ता नहीं, संस्कार
चुनाव के साथ स्पष्ट आचार संहिता तय की गई—
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स्वप्नालय की सामग्री या संसाधनों का दुरुपयोग नहीं
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किसी भी प्रकार का प्रलोभन वर्जित
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डर, दबाव या भेदभाव की कोई जगह नहीं
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भाषा, व्यवहार और प्रचार मर्यादित
बच्चों को बार-बार यह समझाया गया कि—
नेतृत्व का अर्थ शक्ति नहीं, जिम्मेदारी है।
6️⃣ इस चुनाव का वास्तविक महत्व
यह चुनाव बच्चों को यह सिखाता है कि—
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अधिकार के साथ कर्तव्य भी होता है
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असहमति सम्मान के साथ व्यक्त की जा सकती है
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लोकतंत्र सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक संस्कृति है
7️⃣ निष्कर्ष: स्वप्नालय की क्रांति
स्वप्नालय का यह चुनाव भले ही छोटा प्रयास लगे,
लेकिन इसके भीतर एक बड़ा, संवेदनशील और जिम्मेदार भविष्य छुपा है।
अगर हम बच्चों को आज लोकतंत्र जीना सिखा पाए,
तो कल देश को ईमानदार, संवेदनशील और मजबूत नेतृत्व मिलेगा।
यही स्वप्नालय की असली क्रांति है।

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