निवेश का बच्चा: जो आपके साथ ही बड़ा होता है और आपके लिए ही जीता है
हम सभी अपने जीवन में बच्चों को ईश्वर का वरदान मानते हैं। बच्चे के जन्म के साथ ही सपनों की एक नई दुनिया जन्म लेती है—उसकी पढ़ाई, उसका भविष्य, उसकी खुशियाँ, उसकी सुरक्षा। माता-पिता अपनी पूरी ऊर्जा, समय, मेहनत और भावनाएँ इस एक छोटे से जीवन को बड़ा करने में लगा देते हैं। लेकिन इसी बीच हम एक बहुत ज़रूरी बच्चे को जन्म ही नहीं देते—“निवेश का बच्चा।”
मेरा मानना है कि हर जोड़ीदार को अपने पहले बच्चे के साथ-साथ एक निवेश के बच्चे को भी जन्म देना चाहिए। जैसे आपका पहला बच्चा साल-दर-साल बड़ा होता है, वैसे ही यह निवेश का बच्चा भी लगातार बढ़ता रहना चाहिए। और सिर्फ बढ़ना ही नहीं—हर साल कम से कम 10% की बढ़त के साथ।
क्योंकि सच्चाई यह है कि जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वैसे-वैसे उनके खर्च भी बढ़ते हैं।
डायपर से स्कूल, स्कूल से कॉलेज, कॉलेज से करियर—हर पड़ाव पर खर्च बढ़ता है। अगर खर्च बढ़ता है और आय/निवेश नहीं बढ़ता, तो माता-पिता की ज़िंदगी संघर्ष बन जाती है।
निवेश को बच्चा समझने की ज़रूरत क्यों है?
हम बच्चों को बड़ा करने के लिए क्या-क्या करते हैं?
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नींद की कुर्बानी
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अपनी ज़रूरतों को पीछे रखना
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लगातार सीखना, सिखाना
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भविष्य की चिंता करना
लेकिन निवेश के मामले में हमारा व्यवहार बिल्कुल उल्टा होता है।
“थोड़े साल के लिए पैसा लगा देते हैं, फिर निकाल लेंगे।”
“अभी बच्चे छोटे हैं, बाद में देखेंगे।”
“पहले घर, गाड़ी, बाकी बाद में।”
यही सबसे बड़ी भूल है।
निवेश कोई ‘प्रोजेक्ट’ नहीं है जो 3–5 साल में खत्म हो जाए।
निवेश एक जीवन-यात्रा है—बिलकुल आपके बच्चे की तरह।
जब तक हम निवेश को अपने बच्चे जैसा नहीं समझेंगे,
जब तक हम उसे समय, धैर्य और अनुशासन नहीं देंगे,
तब तक वह कभी बड़ा नहीं हो पाएगा।
10% की बढ़ोतरी: भावुक नहीं, व्यावहारिक सोच
हर साल निवेश में 10% की बढ़ोतरी कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि ज़रूरत है।
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बच्चे की उम्र 5 → स्कूल का खर्च
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उम्र 10 → कोचिंग, एक्टिविटीज़
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उम्र 18 → कॉलेज, करियर
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उम्र 25 → शादी, सेटलमेंट
अगर आपका निवेश वहीं का वहीं खड़ा है, तो आप हर पड़ाव पर कर्ज़ की तरफ़ भागेंगे।
लेकिन अगर आपका निवेश का बच्चा हर साल 10% बढ़ रहा है,
तो वही बच्चा एक दिन आपके असली बच्चे की ढाल बन जाता है।
हम बच्चों को बड़ा करते हैं, पर खुद को असहाय बना लेते हैं
एक बहुत कड़वी सच्चाई है, जिसे स्वीकार करना मुश्किल है—
आपके अपने बच्चे आपको आगे संभालेंगे या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं।
वे अपने जीवन में व्यस्त होंगे, अपने संघर्षों में उलझे होंगे।
वे बुरे नहीं होंगे—बस समय नहीं होगा।
लेकिन…
आपका निवेश वाला बच्चा आपको 200% संभालेगा।
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बीमारी में इलाज
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बुढ़ापे में आत्मसम्मान
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दूसरों पर निर्भर न रहने की ताक़त
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“बोझ” कहलाने से बचाव
यह सब वही निवेश का बच्चा देता है।
इज्ज़त सिर्फ रिश्तों से नहीं, आत्मनिर्भरता से आती है
हम समाज में इज्ज़त की बात बहुत करते हैं।
लेकिन सच्चाई यह है कि—
आर्थिक आत्मनिर्भरता के बिना इज्ज़त टिकती नहीं।
जब आपके पास अपना पैसा होता है:
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आप निर्णय खुद लेते हैं
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आप समझौते नहीं करते
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आप झुकते नहीं, बस समायोजन करते हैं
निवेश का बच्चा आपको यही ताक़त देता है।
प्रैक्टिकल अनुभव से एक बात
मैंने अपने जीवन और कार्य में कई परिवार देखे हैं—
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जिनके बच्चे अच्छे हैं, पर माता-पिता आर्थिक रूप से असहाय
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जिनके रिश्ते ठीक हैं, पर इलाज के लिए चंदा
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जिनकी पूरी ज़िंदगी मेहनत में गई, पर अंत में सम्मान नहीं
और दूसरी तरफ़—
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साधारण आय वाले लोग
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लेकिन नियमित निवेश
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धीरे-धीरे बढ़ता हुआ निवेश का बच्चा
आज वही लोग सबसे ज़्यादा आत्मविश्वास से जी रहे हैं।
निवेश का बच्चा कैसे पाला जाए?
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जल्दी जन्म दीजिए – पहले बच्चे के साथ ही
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नियमित भोजन – SIP / मासिक निवेश
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हर साल ग्रोथ डाइट – 10% टॉप-अप
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बीच में मारिए मत – बार-बार निकालना बंद करें
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लंबी उम्र दीजिए – 20–25 साल का समय
यही पालन-पोषण है।
अंत में…
हम अपने बच्चों के लिए सब कुछ करना चाहते हैं,
लेकिन अगर हमने अपने लिए “निवेश का बच्चा” नहीं पाला,
तो वही बच्चे एक दिन हमारे लिए चिंता में पड़ जाएंगे।
निवेश का बच्चा स्वार्थ नहीं है—यह जिम्मेदारी है।
अपने लिए, अपने बच्चों के लिए, और अपने आत्मसम्मान के लिए।
आज ही तय कीजिए—
“मेरे घर में जितने बच्चे होंगे, उतना ही मजबूत मेरा निवेश का बच्चा भी होगा।”
क्योंकि बच्चे बड़े होने में साल लगते हैं,
और निवेश बड़ा होने में विश्वास, अनुशासन और प्यार।
लेखक:
श्री. दिनेश मिश्रा
(आर्थिक सल्लागार | समाजसेवी | लेखक | मानवाधिकार एवं महिला-बाल संरक्षण पर कार्यरत)

It's a great job
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