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श्री. देश मिश्रा एक सोच
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मेरी सोच
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बच्चो के अधिकार
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जातिवादाचा अंत
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“निर्लज्जम सदैव सुखीम्”
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January 03, 2026
शपथों का तमाशा और व्यवस्था का पाखंड
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January 03, 2026
कर्ज़ और क़ब्र के बीच फँसी ज़िंदगी
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January 03, 2026
दिशाहीन कागजी कार्यवाही: एक प्रशासनिक व्याधि
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January 02, 2026
बाल महोत्सव: बच्चों का उत्सव या व्यवस्था का तमाशा?
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December 31, 2025
बच्चे पोस्टर नहीं हैं: प्रचार की वस्तु बनते मासूम चेहरे
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December 31, 2025
चुनाव के दौरान एक जिम्मेदार नागरिक की ज़िम्मेदारी
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December 31, 2025
खुशी जो किसी के जन्मदिन से निकलकर कई ज़िंदगियों तक पहुँची…
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December 30, 2025
एक जीवंत लोकतांत्रिक अभ्यास की विस्तृत रिपोर्ट
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December 29, 2025
"सलाह नहीं, साथ चाहिए!"
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December 27, 2025
लोकतंत्र की असली पाठशाला : बच्चों से सीखने की ज़रूरत
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December 25, 2025
जब देश में चुनाव है, तो स्वप्नालय कैसे पीछे रह सकता है…
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December 23, 2025
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